Tuesday, October 27, 2009

फिर वोही तन्हाई है



फिर वोही वीरानगी फिर वोही तन्हाई है
जिन्दगी फिर उसी मोड़ पे ले आई है
कोई राह नज़र आती नहीं
साथ है तो बस परछाई है

न मैंने किया वादा कोई
न मैंने किया दावा कोई
फिर क्यूँ उदास दिल है आज
क्यूँ बेकरारी छाई है

एक पल चुरा के वक़्त से
सोचा था थोडा झूम लूं
कुछ छन की ख़ुशी के लिए
लम्बी उदासी पायी है

यह कैसी उलझन है
सुलझा न पाऊं मैं
लगता है कोई फंदा है
जिसमें जान फंसाई है

रोऊँ चीखुं चिल्लाओं
पर सुन ने वाला कौन है
वक़्त से ही खुलेंगी परतें
ये वक़्त की गहराई है

16 comments:

  1. परछाईं तो साथ है अच्छा है आगाज।
    गहराई जो वक्त की दिल की है आवाज।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    www.manoramsuman.blogspot.com

    ReplyDelete
  2. Bahut Barhia...Aapka Swagat Hai... Isi Tarah Likhte Rahiye....

    http://mithilanews.com


    Please Visit:-
    http://hellomithilaa.blogspot.com
    Mithilak Gap...Maithili Me

    http://mastgaane.blogspot.com
    Manpasand Gaane

    http://muskuraahat.blogspot.com
    Aapke Bheje Photo

    ReplyDelete
  3. एक पल चुरा के वक़्त से
    सोचा था थोडा झूम लूं
    कुछ छन की ख़ुशी के लिए
    लम्बी उदासी पायी है

    bahut dil e likha hai apne...dil tak jati hai iski mahak..hai na..
    dard se bahar aane ka acha rasta

    ReplyDelete
  4. कुछ छन की ख़ुशी के लिए
    लम्बी उदासी पायी है

    हकीकत है जिंदगी की यही..और जरूरत भी!!

    ReplyDelete
  5. चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लेखन के द्वारा बहुत कुछ सार्थक करें, मेरी शुभकामनाएं.
    ---

    दोस्ती पर उठे हैं कई सवाल- क्या आप किसी के दोस्त नहीं? पधारें- (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

    ReplyDelete
  6. yade jeevan ka khubsurat bhag hai.

    ReplyDelete
  7. बहुत अच्छा लेख है। ब्लाग जगत मैं स्वागतम्।
    http://myrajasthan.blogspot.com

    ReplyDelete
  8. ब्लॉग जगत में स्वागत और बधाई

    ReplyDelete
  9. एक पल चुरा के वक़्त से
    सोचा था थोडा झूम लूं
    कुछ छन की ख़ुशी के लिए
    लम्बी उदासी पायी है.....bahut khoob yar ...likhte raho ...aapki alag pahchan hai aapke vicharon main...

    JAi HO mangalmay ho

    ReplyDelete
  10. हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.....
    इधर से गुज़रा था, सोचा सलाम करता चलूं

    www.samwaadghar.blogspot.com

    ReplyDelete
  11. ha.n pal bhar ki khushi hazar gam bhi de jati hai acchhi rachna badhayi.

    ReplyDelete
  12. कोई राह नज़र आती नहीं
    साथ है तो बस परछाई है
    सुन्दर ।
    आप अच्छा लिखती हैं ।

    ReplyDelete
  13. ब्लॉग परिवार में स्वागत है!लिखते और पढ़ते रहिये...!अपने विचार रखिये..

    ReplyDelete